पश्चिम बंगाल की सियासत में 2026 का विधानसभा चुनाव इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया... क्योंकि इस बार सूबे की सियासत में हुए बदलाव से ममता बनर्जी की 15 सालों की सत्ता खत्म हो गई और पहली बार वहां भाजपा का कमल खिल गया। ऐसे में जिन कंधों पर राज्य को चलाने की जिम्मेदारी थी, अब वही चेहरे इस बार जनता के फैसले के सामने टिक नहीं पाए। सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस को ऐसा झटका लगा है, जिसने राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी है। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात ये कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद अपनी सीट तक नहीं बचा पाईं। भवानीपुर सीट पर शुवेंदु अधिकारी से उन्हें हार का सामना करना पड़ा। लिहाजा... ये सिर्फ एक सीट की हार नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि जनता ने इस बार सीधे तौर नेतृत्व को नकार दिया। दरअसल, आंकड़े बताते हैं कि इस चुनाव में एंटी-इंकंबेंसी यानी सत्ता विरोधी लहर का असर बेहद गहरा रहा.... क्योंकि चुनाव लड़ने वाले 35 मंत्रियों में से 22 मंत्री अपनी सीट नहीं बचा पाए। यानी करीब 63 प्रतिशत मंत्री हार गए... और यही आंकड़ा इस चुनाव की सबसे बड़ी कहानी बन गया है।
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